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Welcome angle in devil's dark world

इनाया ने हॉस्पिटल से निकलने के बाद पूजा से कहा “ पूजा में अब घर चलती हु , तुम भी जाओ”

पूजा “ ऐसे कैसे ? मुझे अच्छे से पता है तुमने सुबह भी थोड़ा ही खाया होगा और रात को भी तुम्हारे वो खडूस चाचा चाची कुछ ढंग से खाने नही देंगे, इसलिए मेरे साथ चलो , पहले हम लोग कुछ अच्छे से खा लेंगे उसके बाद चली जाना तुम”

इनाया ने मुस्कुराते हुए कहा “ यार मेरे चाचा चाची इतने भी खराब नही है, वो बहोत अच्छे है , देखना एक दिन मुझसे बहोत सारा प्यार करेंगे वो”

पूजा “ इस मामले में मुझे अब कुछ नही कहना , तुम चलो हम छोले भटूरे खाते है”

वो इनाया के साथ थोड़ी दूर चलके सड़क के किनारे एक छोटे से स्टॉल पे आ गई , और दो प्लेट छोले भटूरे बनाने को कह दिया ।

उनका खाना आया तो वो स्टैंड पे प्लेट रखके खाने लगे , खाते हुए दोनो बात भी कर रहे थे , और इनाया के चेहरे पे हमेशा की तरह मुस्कुराहट थी।

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आहिर अपने ऑफिस जा रहा था , उसके आस पास हमेशा की तरह सिक्योरिटी थी , वो अपना सिर पीछे सीट से टिकाके बैठ गया, और आंखे बंद कर ली , आंखे बंद करते ही उसकी आंखों के आगे इनाया का खूबसूरत चेहरा आ गया ।

आहिर ने तुरंत अपनी आंखे खोली और सिर झटकते हुए कहा “ ये में क्या सोच रहा हु, उसके बारे में क्यू ही सोचना” कहते हुए उसने अपना चेहरा विंडो की तरफ किया तो एक बार फिर उसकी आंखे बड़ी हो गई ।

उसे सड़क के किनारे स्टॉल पे छोले भटूरे खाती इनाया दिखी, वो देखना तो नही चाहता था , पर एक बार फिर उसकी नजरे इनाया पे टिक गई, उसकी नजरे इनाया की ग्रे आंखे, उसकी छोटी सी नाक , उसकी गर्दन , उसके पतले गुलाबी होठ , हर एक को स्कैन कर रही थी , और आखिर में उसकी नजरे एक चीज पे आके अटक गई.. .. .. इनाया की दिलकश मुस्कान जो किसी को भी घायल कर दे , और सबसे कातिलाना तो उसके होठों के किनारे बना तिल .. .. .. आहिर खो गया उसे देखने में . .. ..

ड्राइवर ने गाड़ी आगे ली तो आहिर ने गुस्से में कहा “ पीछे ले चलो”

ड्राइवर वापस थोड़ा पीछे आया , तो exact ईनाया के सामने आहिर ने कार रोकी , और अब इत्मीनान से उसे देखने लगा ।

उसकी नजरे एक पल के लिए भी इनाया से हट नही रही थी, इनाया को देखते हुए एक खुमारी सी छा गई थी उसकी आंखों में .. .. .. ..

इनाया ने खाना खाया और पूजा के साथ वहा से चली गई लेकिन आहिर अब भी खोए हुए वही देख रहा था , उसे अब भी उस खाली जगह पे भी इनाया नजर आ रही थी .. .. .. ..

उस खामोश सी कार में एक कॉल की आवाज गूंज उठी, जिससे आहिर होश में आया और होश में आने के बाद उसे पता चला की इनाया तो कब की वहा से चली गई ।

उसने गुस्से में अपना हाथ कार की विंडो पे मारा और खुदसे कहा “ शीट! मुझे देखना चाहिए था वो कहा जा रही है , आखिर आहिर शेखावत की आंखे जो किसी भी लड़की को एक नजर देखना पसंद नही करती , उसकी आंखे सिर्फ तुमपे ठहर गई, कुछ तो खास बात है तुम्हारे अंदर” कहते हुए वो मिस्टीरियसली मुस्कुराया और ड्राइवर को कार आगे बढ़ाने को कहा।

कुछ देर बाद , वो अपने विला आया तो उसकी नजर हॉल में बैठी एक औरत पे गई जिसकी उम्र लगभग 50 साल की होगी .. .. .. बनारसी साड़ी, सिर पे पल्लू , गले में बड़ा सा डायमंड हार और चेहरे पे तेज .. .. .. देखने से ही पता चल रहा था की वो किसी रॉयल फैमिली से बिलॉन्ग करती है।

आहिर ने उसे देख कहा “ बड़ी मां आप ?

वो औरत जिनका नाम जानकी शेखावत था , उन्होंने आवाज सुनते ही आहिर को देखा तो उसे देखते ही उनकी आंखे नम हो गई ।

आहिर उनके पास आया और आते ही उसने झुकके उनके पैर छू लिए, जानकी जी ने उसे गले लगाया और कहा “ हमारा बच्चा , हम आपसे नाराज है आहिर , आप यहां आ तो गए पर अपने घर नही आए इसलिए हम खुद यहां आए , भले ही आपको याद नही आई पर एक मां को अपने बच्चे की याद हमेशा आती है”

आहिर “ कैसी बात कर रही है आप बड़ी मां, में भला आपको कभी भूल सकता हूं क्या ?

जानकी जी “ तो फिर घर क्यू नही आए ? अच्छा वो सब छोड़ो, अब चलो घर , हमें जैसे ही पता चला आप आए है तो हम लगे हाथ यहां आ गए”

आहिर कुछ कहता उससे पहले ही जानकी जी ने उसका हाथ अपने सिर पे रखा और कहा “ आपको हमारी कसम बेटा”

आहिर ने अब कुछ नही कहा .. .. ..

करीब 1 घंटे बाद , एक कार , एक बड़े से पैलेस के अंदर इंटर हुए , जिसमे से आहिर और जानकी जी बाहर निकले ।

उस पैलेस को देखते हुए आहिर की आंखों के सामने कुछ लम्हे आके गुजर गए , जानकी जी ने कहा “ जानते है बेटा , आपको किसकी याद आ रही है, पर हम भी क्या करे , आपको हमेशा बेटा माना है, आपसे दूर नही रह पाए”

आहिर ने उनका हाथ पकड़ कहा “ बड़ी मां, अब में आपको छोडके कही नही जाऊंगा , बहुत भाग लिया में इस घर से पर अब और नही, अब में यहां से कही नही जाऊंगा”

ये सुनते ही जानकी जी के होठों पे बड़ी सी मुस्कुराहट तैर गई, वो आहिर के साथ बीच के बने रास्ते से होते हुए अंदर आ गई, रास्ते के दोनो तरफ पेड़ और पेड़ पे मिनी लैंटर्न्स लगे थे ।

वो पैलेस बहुत ही बड़ा और बहुत ही आलीशान था , आहिर और जानकी जी मैन दरवाजे पे आए , तो वहा एक औरत जिसकी उम्र लगभग 40 साल होगी वो दरवाजे पे आरती की थाल लेके खड़ी थी , उसके पीछे ही एक आदमी और एक लड़की खड़ी थी ।

उन्होंने आहिर की आरती की, और टीका लगाके कहा “ अब आइए बेटा अंदर”

आहिर अंदर आया और सबके पैर छू लिए , सबसे मिलके वो काफी खुश था, उसके इमोशंस किसी के सामने जाहिर नही होते थे , पर अपने परिवार से वो बहुत प्यार करता था , और उसके परिवार की तो जान बसती थी उसमें.. .. ..

आहिर के परिवार में , उसकी बड़ी मां यानी बड़ी चाची जानकी जी और चाचा राजवेंद्र.. .. .. इनकी एक ही बेटी थी जानवी जिसकी शादी हो चुकी थी, आहिर की छोटी चाची अपर्णा , और चाचा अनूप .. .. .. इनके 2 बच्चे थे , बड़ा बेटा अनीश जिसकी शादी हो गई थी, और उसकी पत्नी का नाम सुहाना , और इस परिवार की सबसे छोटी बेटी निष्का .. .. ..

सबसे मिलने के बाद , आहिर अपने इलाके में यानी सबसे लास्ट फ्लोर पे आया , वहा पे सारी चीजे बेहद नीट एंड क्लीन थी, ये देख आहिर को अच्छा लगा , वो अपने रूम में आया , जो ब्लैक एंड डार्क ब्राउन कलर का था, वहा पे ऑलमोस्ट सारी चीजे , परदे से लेके बेडशीट तक का कलर डार्क था।

आहिर कमरे में आते ही शावर लेने चला गया ।

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इनाया अपने घर आ चुकी थी, और फ्रेश होके वो सीधा किचन की तरफ बढ़ गई, किचन में आके वो जल्दी जल्दी अपने हाथ चलाने लगी, क्योंकि डिनर का समय हो चला था, और टाइम पे डिनर नही मिला तो उसकी चाची हंगामा कर देती ।

उसने बड़े ही कम समय में पूरा डिनर प्रिपेयर कर दिया था, और अब उसे लेके बाहर डाइनिंग टेबल पे आ गई, जिसमे सिर्फ 5 ही चेयर्स थी।

धीरे धीरे उसके चाचा , चाची , भैया भाभी और उनका बेटा आके बैठ गए तो इनाया ने सबको डिनर सर्व किया , हालाकी उसके भैया भाभी को बहुत तकलीफ होती थी की वो सब खा रहे है और इनाया अकेली सबको सर्व करेगी पर खुद नही खायेगी , पर बड़ो के डर से वो कुछ नही बोलते थे।

कुछ ही देर में , सबका डिनर हो गया तो इनाया ने सारे बर्तन किचन में रखे और बर्तन धोने के बाद वो अपने कमरे में आई , पूजा के साथ उसने खाना खा रखा था तो खुदके लिए उसने कुछ बनाया ही नही था ।

वो अपने कमरे में आके , बालकनी में जाके बैठ गई, और चांद तारों को देखने लगी।

उसने आसमान में तारों को देखते हुए कहा “ आप बचपन में कहती थी ना मां की मेरे लिए कोई राजकुमार आएगा , मुझे नही पता वो राजकुमार कभी आयेंगे या नही पर इतना जरूर पता है की आपकी इनाया बहुत स्ट्रॉन्ग है, देखना बहुत जल्द अब में जॉब करने लग जाऊंगी , फिर आपको मुझपे बहुत प्राउड होगा ना मां - बाबा , की आपकी इनाया अपने पैरों पे खड़ी हो गई,” कहते हुए उसकी आंखे झिलमिला गई ।

ये उसका रोज का काम था यहां आके अपने मां बाबा से बात करना और भले ही कितनी भी खुश क्यू ना रहे लेकिन उनसे बात करते हुए उसकी आंखे नम हो ही जाती ।

दूसरी तरफ ,

आहिर बालकनी में खड़ा था और उसके हाथ में सिगरेट थी, वो अपनी डेडली नजरों से चांद को देख रहा था , देखना क्या वो बस घूरे जा रहा था .. .. ..

पर अचानक ही चांद पे काले बादल छा गए , और ये देखते ही आहिर के होठों पे गहरी मुस्कुराहट आ गई , उसने सिगरेट का लंबा कश लेते हुए कहा “ चांद की खूबसूरती को छुपाने के लिए ये काले बादल जरूरी है, लगता है ये बादल भी चाहते है की चांद को इनके अलावा कोई और ना देखे”

कहते हुए उसकी आंखों के सामने इनाया का चांद सा चेहरा आ गया , उसने खुदसे कहा “ आहिर शेखावत की नजरे ठहरी है तुमपे, तो तुमपे भी अब काले बादल छाने का समय आ गया है, तुम्हारी खूबसूरती पे ये काले बादल मंडरा रहे है और बहुत जल्द तुम्हे अपने अंदर पूरी तरह समा भी लेंगे, फिर तुम बनोगी शैतान की महबूबा,”

कहते हुए उसने सिगरेट का धुआ छोड़ा और अपना फोन निकाल किसी को कॉल किया ।

सामने से कॉल पिक होते ही आहिर ने कहा “ जो लड़की आज कॉलेज में मेरा वेलकम कर रही थी , उसकी सारी इन्फोर्मेशन मुझे आधे घंटे के अंदर चाहिए , और हा एक भी बात छूटी तो तुम्हारी सांसे भी तुमसे छूट जाएंगी”

इतना कहकर उसने कॉल कट किया और इनाया का चेहरा याद करते हुए कहा “ welcome angle in devil's dark world”

ये कह वो शैतानों की तरह हसने लगा , उस रात में उसकी हसी बेहद डरावनी लग रही थी ।

To be continued ✍🏻

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radhyapatni

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