एक लड़की उस कमरे के बालकनी में बैठी पौधों को पानी डाल रही थी, उस बालकनी में बहुत से फूलों के पौधे लगे हुए थे , और उसमें बहुत खूबसूरत से फूल खिले हुए थे , पर वो लड़की जो उन फूलों को पानी देते हुए प्यार से निहार रही थी वो उन फूलों से भी नाजुक थी , उसके खूबसूरत चेहरे पे सुबह की हल्की धूप आ रही थी , जो उसके दूध से गोरे रंग को और भी चमका रही थी।
उसके काले सिल्की लंबे बाल, जो हवा से लहरा रहे थे , ऐसे लग रहा था जैसे वो हवा भी उसे छुके उसकी हसीन और दिल में समा जाने वाली खुशबू से महक रही हो।
उस लड़की ने पानी डालने के बाद उस वॉटरिंग कैन को टेबल पे रखा और उन नाजुक फूलों को हाथ लगाके देखने लगी, उसके हाथ एकदम गोरे और किसी रूई की तरह मुलायम थे , फूलो को हाथ लगाए समझ ही नही आ रहा था की कोन ज्यादा सॉफ्ट है वो फूल या उस लड़की के हाथ ।
उसने उन फूलों को छूते हुए प्यार से अपनी मीठी आवाज में कहा “ मुझे तुम सब फूल बहोत पसंद हो , पर में तुम्हे इन पौंधो से इसलिए नही निकालती क्योंकि मुझे पता है तुम्हे दर्द होता होगा ना, इसलिए तुम सिर्फ इन पौधों पे ही अच्छे लगते हो ” कहते हुए वो मुस्कुराई ।
वो अभी अपनी ही दुनिया में थी , की उसके कान में किसीकी आवाज आई “ काया बेटा , आप तैयार हो गई क्या ? आज आपका रिजल्ट है , और आपको अपनी दोस्त के साथ अपने नंबर भी देखने है”
कहते हुए एक बूढ़ी औरत उसके कमरे में आई , और जैसे ही उसने उसे बालकनी में देखा तो कहा “ बच्चे आपको ज्यादा तेज धूप सहन नही होती ना , क्यू वहा बैठे हो , आओ अंदर”
वो खूबसूरत लड़की जिसका नाम काया था , उसने अपनी मीठी आवाज में कहा “ जी दाईमां, में अभी अंदर आ ही रही थी, आप तो जानती है ना सुबह सुबह इन फूलों को ना देखू तो मेरा दिन अच्छा नही जाता”
उसकी बात सुन , उसकी दाईमा मुस्कुराई , और कहा “ अच्छा तो मेरा बच्चा रेडी हो गया ?
काया “ हा ऑलमोस्ट रेडी , बस चेंज करके आती हु फिर.. .. .. ..
“ फिर नाश्ता करना है” दाई ने बीच में टोकते हुए कहा । काया मुस्कुराई और हा कह चेंज करने चली गई।
कुछ ही देर में , वो चेंज करके आई , बेबी पिंक कलर का फ्लोरर सूट पहने वो बेहद प्यारी लग रही थी ,वैसे तो उसके गोरे रंग पे कोई भी रंग ओढ़ा दो , उस रंग की शान बढ़ जाती, हर एक रंग उसपे खिलता था .. .. .. .. आखिर वो थी ही इतनी खूबसूरत की खूबसूरत शब्द भी उसे देख खुदपे इतराए .. ..
काया मिरर के सामने खड़ी हुई , और सनस्क्रीम लगाई , क्योंकि उसे ज्यादा धूप सहन नही होती थी , धूप में उसकी गोरी स्किन लाल पड़ जाती .. .. .. इसका एक कारण ये भी था की वो सिर्फ 10 साल की थी जब एडिनबर्ग आई थी, और यहां का वेदर हमेशा ही ठंडा रहता है , ज्यादा तेज धूप कभी खिलती नही थी .. .. ..
खैर , अपने होठों पे लिपबाम लगाके वो बाहर आई और आते ही सीधा घर में बने कान्हा के मंदिर चली गई, उनकी पूजा करने के बाद दाई ने उसे ब्रेकफास्ट करने बिठाया , काया ने चाय पी और दाई के साथ अपना ब्रेकफास्ट फिनिश किया, इस घर में वो दोनो ही रहती थी।
काया ने ब्रेकफास्ट करने के बाद अपनी दोस्त एल्सा को फोन किया , तो सामने से एल्सा ने कहा “ काया बेबी, में रास्ते में ही हु बस पोहुंच रही हु”
काया मुस्कुराई , और कहा “ ठीक है में वेट कर रही हु , जल्दी आना साइट बस कुछ ही देर में ओपन होने वाली है ”
कुछ ही देर में , एल्सा आई तो काया और एल्सा उसके कमरे में आके अपने रिजल्ट चेक करने बैठ गई , एक्चुअली आज उनके 12th का रिजल्ट था ।
काया ने जैसे ही साइट ओपन करके अपना रिजल्ट देखा , उसके होठों पे प्यारी सी स्माइल आ गई, उसे 98% आए थे और एल्सा को 70% , एल्सा ने ये देख खुशी से कहा “ congratulations कायू, आज तो पार्टी बनती है”
काया ने हंसते हुए अपनी प्यारी आवाज में कहा “ तुम्हे भी congratulations और हा पार्टी तो करेंगे , आज हम किसी अच्छे से होटल चलेंगे और वही पे लंच करेंगे ”
ये सुन , एल्सा ने बोरियत से कहा “ क्या यार तू भी , होटल में जाके खाना खाके क्या ही एंजॉय करेंगे , हम किसी अच्छे से क्लब में चलते है”
काया की खूबसूरत हेजल आंखे बड़ी हो गई , उसने हैरत से कहा “ ये क्या बोल रही हो ? बिलकुल नही तुम जानती हो ना में आज तक कभी क्लब में नही गई , तो अब भी नही जाऊंगी”
उसकी बात पे एल्सा ने कुछ कहना चाहा तो काया ने उसका हाथ पकड़ प्यार से कहा “ प्लीज अब मुझे फोर्स मत करना, में किसी का दिल दुखा भी नही पाऊंगी और वहा जाके अपने मम्मा और पापा का भरोसा नही तोड़ सकती”
एल्सा ने बोरियत से उसे देखा और कहा “ ok fine, club मे, में अकेली चली जाऊंगी , बट उससे पहले तेरे साथ लंच करने भी जरूर जाऊंगी, आखिर मेरी दोस्त ने इतने अच्छे मार्क्स लाए है , सेलिब्रेट करना तो बनता है”
उसकी बात सुन , काया मुस्कुराई और फिर दोनो दाई को अपना रिजल्ट बताके लंच करने चली गई , दाई को बाहर का खाना सहन नही होता था तो वो नही गई साथ .. .. ..
खैर, लंच करने के बाद काया घर लौटी, तो दाई ने कहा “ काया बच्चे , घर फोन करके भी तो बताओ ना , आपके मम्मा पापा का फोन आया था अभी”
काया ने खुदको चपत लगाते हुए कहा “ हा दाईमां याद ही नही रहा , अभी जाके करती हू ” कहते हुए वो कमरे में गई और फोन किया।
उधर से , किसी ने कॉल उठाया तो काया ने खुश होते हुए कहा “ पापा, मुझे 98 पर्सेंट आए है”
उसकी बात सुन ,सामने से उसके पापा मिस्टर एकांश बिरला ने खुश होके कहा “ वाव, मुबारक हो मेरे बच्चे , में तुम्हारी कामयाबी से बहोत खुश हूं ऐसे ही सक्सेस हासिल करते रहो "
तभी , किसी ने उनके हाथ से फोन लेते हुए कहा “ काया बच्चे अब इंडिया आ जाओ , अब तो 12th भी हो गई , अब आगे की पढ़ाई तुम यहां पे आके ही पूरी करो , और इसमें में तुम्हारी एक भी नही सुनूंगी , सालों पहले तुम्हारे पापा की जिद की वजह से मेरी बच्ची मुझसे दूर हो गई , पर अब और नही .. .. .. अब तुम्हे इंडिया आना ही होगा , यहां भी बहुत अच्छे कॉलेज है इसलिए जल्द से जल्द आ जाओ”
ये काया की मम्मा मिसेज सौम्या एकांश बिरला थी .. .. .. .. काया ने अपनी मम्मा की बात सुन , गहरी सांस लेके कहा “ ohk मम्मा , में इंडिया आ जाऊंगी, लेकिन सबसे पहले बनारस जाऊंगी , उसके बाद सबके पास आऊंगी, आपको पता है ना मेरा कितना मन है वहा जाने का, प्लीज मना मत कीजिए , दाईमां साथ ही रहेंगी”
उसकी बात पे , उसके मम्मी पापा ने परमिशन दे दी , तो उसने खुशी से उछलते हुए कहा “ थैंक्यू सो मच मम्मा पापा , में कल ही यहां से निकलूंगी”
कहते हुए उसने फोन रखा और भागते हुए दाई के पास जाके सब कुछ बता दिया तो दाई भी खुश हो गई और कहा “ में अभी से सारी तैयारियां शुरू करती हू”
काया “ जी और में फ्लाइट की टिकिट बुक करती हू” ये बोल वो भागते हुए अपने कमरे में चली गई।
खैर , भागा दौड़ी में दिन गुजर गया।
रात के 3 बजे, घर लॉक करके काया और दाई बाहर आई, बाहर आते ही काया ने माली से कहा “ माली काका , हम लोग अब हमेशा के लिए यहां से जा रहे है लेकिन प्लीज आप इस घर के साथ साथ इन पेड़ों का और इन फूलों का ध्यान रखिएगा”
कहते हुए उसने एक नजर पीछे पलटके अपने घर और गार्डन को देखा और फिर गहरी सांस लेके वहा से आगे बढ़ गई।
ड्राइवर ने कार निकाली और फिर कुछ ही देर में, काया एयरपोर्ट पे आई और चेक इन कर प्लेन में जाके बैठ गई।
उसने अपनी आंखे बंद की , और खुदसे कहा “ बाय बाय एडिनबर्ग और एल्सा पता नही अब यहां कब आना होगा पर में इस शहर को और यहां के लोगो को बहुत मिस करूंगी”
वही , दूसरी तरफ,
इंडिया में ,
लखनऊ के सबसे बड़े vip क्लब में ,
ये क्लब लखनऊ का most expensive club था.. … .. जो सिर्फ अमीरजादे ही अफोर्ड कर सकते थे .. .. .. .. क्लब में चारो तरफ कभी ग्रीन , कभी रेड तो कभी blue and purple लाइट्स जगमगा रही थी साथ ही में म्यूजिक का वॉल्यूम भी जोरो पे था , हर तरफ हुक्का और सिगरेट का धुआं फैला हुआ था , वहा मौजूद हर कोई अपनी ही धुन में पार्टी कर रहा था।
इन सबसे अलग , काउच पे एक लड़का बड़े ही अदब से राजा की तरह बैठा था , ब्लैक शर्ट , उसपे ब्लैक जैकेट और ब्लैक जींस पहने वो इतना ज्यादा हैंडसम था की वहा मौजूद हर एक लड़की उसपे दिल हार चुकी थी , वो ब्लैक कलर जैसे उसके लिए ही बना हो , उसपे गोरे रंग पे वो ब्लैक कलर चार चांद लगा रहा था .. .. .. उसके गले मे शेर का लॉकेट था, एक हाथ में महंगी ब्रैंडेड वॉच और उंगलियों में डायमंड , रूबी ,माणिक की रिंग्स और एक कान में डायमंड स्टड , हल्की दाढ़ी, सलीके से सेट किए बाल , गहरी नीली आंखे .. .. .. उसकी एक झलक ही काफी थी किसी को भी घायल करने को .. .. .. ..
उसका एक हाथ सोफे के हैंडल पे था और उस हाथ में ड्रिंक का ग्लास था वही , उसके होठों में सिगरेट उलझी थी जिसके वो कश ले रहा था, दिखने में तो सबसे हैंडसम था but उससे बेहद डार्क वाइब्स आ रही थी.. .. ..
एक वेट्रेस उसके पास आई और टेबल के सामने बैठ उसे ड्रिंक सर्व करने लगी , ड्रिंक सर्व करते वक्त उसका हाथ भी थर थर कांप रहा था , लेकिन फिर भी वो कोशिश कर रही थी की उससे कोई भी गलती ना हो, क्योंकि वो जानती थी सामने बैठा लड़का कितना बेरहम है ,एक भी गलती होने का अंजाम सीधा मौत ही मिलता।
उसने डरते हुए ड्रिंक सर्व की और वहा सिर झुकाए खड़ी हो गईं तो उस लड़के ने दो उंगलियों से उसे जाने का इशारा किया , वो वेट्रेस जितनी जल्दी हो सके वहा से निकल गई।
वो लड़का ड्रिंक करने लगा , तभी उसके पास उसकी एक दोस्त आई और उसका हाथ पकड़ बोली “ निर्भय come on , let's dance na कबसे यहां बैठे स्मोक एंड ड्रिंक कर रहे हो , बस बहुत हुआ चलो अब"
कहते हुए उसने उसका हाथ पकड़ा और उसे लेके डांस फ्लोर पे आ गई , वो लड़का जिसका नाम निर्भय था , वो उसे मना नही कर पाया क्योंकि वो उसकी दोस्त थी।
वो डांस कर ही रहा था की तभी उसका फोन वाइब्रेट हुआ , उसने फोन देखा और अपना हाथ उठाया , जैसे ही उसका हाथ उठा पूरा क्लब एक दम से शांत हो गया , म्यूजिक जल्दी से बंद हुआ , उसके एक इशारे पे पुरे क्लब में पिन ड्रॉप साइलेंस हो गई।
निर्भय ने अपना फोन उठाया और कहा “ हा मम्मा”
सामने से उसकी मम्मा ने कहा “ पार्टी हो गई हो तो बनारस के लिए निकलो, दर्शन और गंगा आरती करके ही लौटना”
“ Ok मम्मा” कहकर उसने फोन रख दिया , और अपने दोस्तो को देख कहा “ guys , let's go बनारस के लिए निकलना होगा मम्मा का फोन आया था।
उसकी बात सुन , उसके सारे दोस्त उसके पास आ गए , उसके दोस्तो में दो लड़के ( अहान , निर्वाण ) और दो लड़कियां ( काम्या , नेत्रा ) थी।
खैर , वो लोग जाने लगे , तभी एक लड़के ने अपने पास खड़े दुसरे के कान में कहा “ देखा , पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में रखने वाला निर्भय सिंह राजवंश कैसे अपनी मां से डरता है”
उसने कहा तो बड़ी धीमी आवाज में था पर निर्भय के तेज कानो ने ये तक सुन लिया .. … .. .. .
और ये सब सुनते ही उसकी आंखे सर्द हो गई , वो पलटके उस लड़के के पास आया और उसके कंधे को दबाते हुए सर्द आवाज में कहा “ कुछ कहा तूने ?
उस लड़के ने अपना थूक गटक लिया और कहा “ न नही तो मै में क्या कहूंगा ?
निर्भय ने उसके कॉलर को पकड़ लिया और कहा “ लेकिन मैने तो कुछ सुना like निर्भय सिंह राजवंश अपनी मां से डरता है एंड ऑल , क्या मेरे कानो ने गलत सुना?” कहते हुए निर्भय ने उसे कॉलर से पकड़ ऊपर उठाया।
लड़के के पैर हवा में लटकने लगे , वो डर से कांपने लगा क्योंकि उसे अब अपना अंजाम पता था , उसने बेहद डरते हुए कहा “ प्लीज प्लीज मुझे माफ कर दीजिए , गलती हो गई”
निर्भय ने सर्द नजरों से उसे घूरा और कहा “ गलती हो गई ? but मेरे पास गलती नाम का वर्ड exist नही करता”
ये कह निर्भय ने उसके गले को कसके पकड़ लिया और दीवार से लगा दिया, उस लड़के की आंखे बाहर निकलने को हुई .. .. .. .. उसकी आंखों से आंसू बहने लगे , निर्भय ने बेहद कसके उसे पकड़ा था।
कुछ देर झटपटाने के बाद वो लड़का बेहोश होने लगा तो निर्भय ने छोड़ दिया और कहा “ आइंदा से निर्भय सिंह राजवंश के बारे में कुछ भी बात कहने से पहले हजार बार सोचना क्योंकि निर्भय सिंह राजवंश एक बेहद सनकी इंसान है ”
उस लड़के ने रोते हुए हाथ जोड़ लिया, ये देख निर्भय ने सिर हिलाते हुए कहा “ इतनी सी मार पे रोने लग गया , हट लानत है तेरे मर्द होने पे”
ये बोल उसने अपने दोस्तों से कहा " let's go guys "
वो अपने दोस्तों के साथ वहा से चला गया पर उसके पीछे वो लड़का उसकी बात का मतलब समझता रह गया , आखिर कहना क्या चाहता था निर्भय , उसका एक हाथ ही किसी लोहे की तरह सख्त था , इंसान उसके एक हाथ से ही ढेर हो जाए।
निर्भय आके अपनी एक्सपेंसिव लैंबोर्गिनी में बैठ गया , उसके पीछे ही उसके दोस्तों की स्पोर्ट्स कार थी , वो सब बनारस के लिए निकल गए . .. .. ..
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वाराणसी एयरपोर्ट,
दोपहर के 1 बज रहे थे, लंबी फ्लाइट के बाद काया और दाई इंडिया आ चुके थे।
काया ने एयरपोर्ट को देखते हुए खुदसे कहा “ सालों पहले मैने इंडिया को छोड़ा था , अब वापस आ रही हु ,होप अब सब अच्छा हो , अब पापा को किसी से कोई शिकायत ना हो" कहते हुए वो आगे बढ़ गई।
काया और दाई कैब में बैठ होटल आए और पहले लंच किया और फिर कुछ देर आराम करने अपने कमरे में चले गए , दोनो एक ही कमरे में रहने वाले थे।
आराम करते हुए शाम हो गई , शाम को चाय पीने के बाद वो दोनो तैयार हो गए, काया ने लाल रंग का चूड़ीदार सूट पहना हुआ था , बाल खुले ही छोड़े थे , कानो में छोटे झुमके , और होठों पे हल्का सा लिपबाम लगाए वो बहुत खूबसूरत लग रही थी।
दाई ने उसकी नजर उतारते हुए कहा “ मेरी बच्ची दिन पर दिन और खूबसूरत होती जा रही है ,”
काया ने मुस्कुराते हुए कहा “ दाईमां मेरी तारीफ बाद में कीजिए पहले चलिए मुझे गंगा मैया की आरती मिस नही करनी”
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बनारस का अस्सी घाट ,
शाम का समय था, गंगा आरती की सारी तैयारियां हो चुकी थी और चारो तरफ दियो की जगमगाहट थी , दियों की रोशनी में पूरा घाट चमक रहा था।
निर्भय अपने दोस्तों के साथ सीढ़िया उतर घाट पे आ गया , उसे ना तो आरती में इंट्रेस्ट था और ना भगवान में .. .. .. यहां बस वो अपनी मां की जिद के चलते आया था।
खैर, भीड़ बहोत थी पर हर तरफ खुशनुमा माहौल था, निर्भय की नीली आंखे बिना किसी भाव के सामने की तरफ देख रही थी .. .. .. तभी उसके कानो में एक प्यारी सी आवाज आई “ जल्दी जल्दी सामने की तरफ चालिए दाईमां, मुझे सामने से आरती देखनी है”
इस आवाज को सुन निर्भय की आंखों में अजीब से भाव आ गए , उसने जल्दी से उस दिशा मे देखा जहा से वो आवाज आई थी , पर इतनी भीड़ में कुछ साफ नही दिखा, निर्भय वहा से जाता उससे पहले ही आरती शुरू हो गई , वैसे तो उसे कोई इंटरेस्ट नही था पर अब आया ही था तो देखना तो बनता है।
खैर , आरती खत्म होते ही निर्भय सामने घाट की तरफ आया , उसने एक नजर चारो तरफ देखा तो उसकी नजरे एक जगह आके ठहर गई , एक लड़की मुस्कुराते हुए अपने हाथों में पकड़े दिए को देख रही थी , उसने अपनी पलके बंद की और कुछ कहने लगी शायद कोई दुआ मांग रही थी , दिए की रोशनी में उसका दूध सा गोरा चेहरा सोने की तरह चमक रहा था, उसके हिलते होठ ऐसे लग रहे थे जैसे कोई नाजुक सी पंखुड़ियां हो...
निर्भय की आंखे उसके चेहरे के हर हिस्से को गहरी नजरों से देख रही थी, उस लड़की ने नीचे झुकके दिए को पानी में छोड़ दिया और जैसे ही ऊपर उठी उसकी खूबसूरत हेजल आंखे निर्भय की गहरी नीली आंखों से जा टकराई.. .. .. अगले ही पल उस लड़की ने नजाकत से अपनी पलके झुकाई और वहा से आगे बढ़ गई।
निर्भय पूरी तरह से खो चुका था उस लड़की के दीदार में .. .. ..
To be continued ✍🏻
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