
सुहागरात का नाम सुनते ही दुआ का चेहरा लाल पड़ गया, उसे एक सिहरन सी महसूस हुई..... उसकी पलकें अपने आप झुक गईं और दिल की धड़कनें जाने क्यों बेकाबू होकर धड़कने लगीं, आज तक उसने इस पल के बारे में सिर्फ सुना था, कभी अपनी ज़िंदगी में इसके इतने करीब आने का सोचा भी नहीं था।
बचपन से जो ख्वाब सजाया था, आज वो हकीकत बन चुका था, अब वो सचमुच आक्रोश की पत्नी थी... और ये एहसास ही उसके पूरे वजूद में एक मीठी सी सिहरन दौड़ा रहा था।






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