
अगली सुबह,
सुबह के 7 बज रहे थे। सूरज की हल्की किरणें पर्दों से छनकर सीधा इनाया के चेहरे पर पड़ रही थीं, जिस वजह से उसकी आंखें हल्के हल्के फड़फड़ाने लगीं। कुछ देर बाद उसने धीरे से अपनी आंखें खोलीं। आंखें खुलने के दो मिनट बाद ही उसके दिमाग में पिछली रात की सारी बातें एक एक करके प्रोसेस होने लगीं, आहिर के साथ हुई इंटीमेसी सब उसके माइंड में चलने लगा, जिस वजह से उसके गाल लाल हो रहे थे।






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