
सुहागरात का नाम सुनते ही इनाया की धडकने बढ़ गई, उसने आहिर को देख कहा “बिल्कुल नहीं, मुझे आपके साथ कोई सुहागरात नहीं मनानी इसलिए प्लीज आप मुझे मेरे घर….”
कहते हुए वो रुक गई क्योंकि अब उसका घर वही था जो आहिर का था, ना चाहते हुए भी वो उसका पति बन ही चुका था तो अब बहस करने से क्या ही हासिल होने वाला था, उसने आहिर को देखा और टूटी हुई आवाज में कहा “मुझे फिलहाल बस आराम करना है, बाकी कुछ नहीं, इसलिए प्लीज आप मुझे जहां भी ले जा रहे है वहां जाके मुझे आराम करने दीजिए, बाकी कुछ नहीं करना मुझे”






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