
इनाया सीढ़ियों से जल्दी जल्दी नीचे उतरी, उसके चेहरे पर साफ बेचैनी थी, वो जैसे ही घर से बाहर निकलने लगी, तभी सामने से मिशा आ गई, इनाया को देखते ही मिशा का चेहरा खिल उठा, वो तुरंत उसकी तरफ बढ़ी और खुश होकर बोली, “अरे इनाया! तुम यहाँ? अच्छा हुआ तुम आ गई… अब तो मैं तुम्हारे साथ अच्छे से होली खेल सकती हूँ”
इतना कहते हुए मिशा ने रंग से भरा हाथ उसकी तरफ बढ़ाया ही था कि इनाया ने तुरंत उसका हाथ पकड़कर उसे रोक दिया, उसके चेहरे पर ना कोई मुस्कान थी, ना होली वाली चहक.… बस हल्की सी घबराहट और बेचैनी थी।





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