
दुआ को बालकनी में कोई नही दिखा, ये देख वो वापस कमरे में जाने के लिए मुड़ी की तभी किसी ने पीछे से उसका दुपट्टा पकड़ लिया, दुआ की सांसे तेजी से बढ़ गई , बिना पीछे मुड़े ही जैसे उसे अहसास हो गया था की पीछे कोन हो सकता है……
दुआ ने धीरे से पलटके देखा और जैसा की उसे पता ही था वहा आक्रोश था, जो की रेलिंग से लगके खड़ा था, काले रंग की पतली सी शर्ट, जिसके अंदर से उसका चौड़ा सीना साफ दिख रहा था, उसके काले सिल्की बाल जो कुछ माथे पे बिखर रहे थे, कानो में डायमंड स्टड , गोरा रंग, काली स्याही सी आंखे जिनमें दुआ का अक्स था, वो बड़ी ही दिलकश नजरों से दुआ को देख रहा था, इसमें कोई दोहराए नही थी की वो एकदम कातिल दिखता था।





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